Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 24

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- वसिष्ठो मैत्रावरुणिः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- आग्नेयं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- आग्नेयं पर्व
Mantra with Swara
अ꣢ग्ने꣣ र꣡क्षा꣢ णो꣣ अ꣡ꣳह꣢सः꣣ प्र꣡ति꣢ स्म देव रीष꣣तः꣢ । त꣡पि꣢ष्ठैर꣣ज꣡रो꣢ दह ॥२४॥

अ꣡ग्ने꣢꣯ । र꣡क्ष꣢꣯ । नः꣣ । अँ꣡ह꣢꣯सः । प्र꣡ति꣢꣯ । स्म꣣ । देव । रीषतः꣢ । त꣡पि꣢꣯ष्ठैः । अ꣣ज꣡रः꣢ । अ꣣ । ज꣡रः꣢꣯ । द꣣ह ॥२४॥

Mantra without Swara
अग्ने रक्षा णो अꣳहसः प्रति स्म देव रीषतः । तपिष्ठैरजरो दह ॥

अग्ने । रक्ष । नः । अँहसः । प्रति । स्म । देव । रीषतः । तपिष्ठैः । अजरः । अ । जरः । दह ॥२४॥

Samveda - Mantra Number : 24
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 3;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 3;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(अग्ने देव) हे ज्ञानप्रकाशस्वरूप परमात्मदेव! तू (नः-अंहसः-रक्ष) हमें पाप से बचा (अजरः) तू अजर-जरारहित होता हुआ (तपिष्ठैः-रिषतः प्रतिदह स्म) अपने सन्तापक साधनों से पीड़ित करने वाले कामक्रोध आदि को भस्म कर दे।
Essence
परमात्मदेव! तू अन्दर बैठे पीड़ा देने वाले कामक्रोध आदि पाप को अपने सन्तापक बलों से भस्म करके हमारी रक्षा करता है, परमात्मन्! तू अजर है जरा से रहित है, संसार में हमारी रक्षा करने वाले तो जराधर्मी हैं कोई जरा को प्राप्त हो गए कोई प्राप्त होने वाले हैं, किन्तु तेरा रक्षण सदा रहने वाला है अतः हम तेरे आश्रित हैं तू ही रक्षा कर॥४॥
Special
ऋषिः—वसिष्ठः (परमात्मा में अत्यन्त वसने वाला उपासक)॥