Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 236

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- नोधा गौतमः Chhand- बृहती Swara- मध्यमः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
तं꣡ वो꣢ द꣣स्म꣡मृ꣢꣫ती꣣ष꣢हं꣣ व꣡सो꣢र्मन्दा꣣न꣡मन्ध꣢꣯सः । अ꣣भि꣢ व꣣त्सं꣡ न स्वस꣢꣯रेषु धे꣣न꣢व꣣ इ꣡न्द्रं꣢ गी꣣र्भि꣡र्न꣢वामहे ॥२३६॥

त꣢म् । वः꣣ । दस्म꣢म् । ऋ꣣तीष꣡ह꣢म् । ऋ꣣ति । स꣡ह꣢꣯म् । व꣡सोः꣢꣯ । म꣣न्दान꣢म् । अ꣡न्ध꣢꣯सः । अ꣣भि꣢ । व꣣त्स꣢म् । न । स्व꣡स꣢꣯रेषु । धे꣣न꣡वः꣣ । इ꣡न्द्र꣢꣯म् । गी꣣र्भिः꣢ । न꣣वामहे ॥२३६॥

Mantra without Swara
तं वो दस्ममृतीषहं वसोर्मन्दानमन्धसः । अभि वत्सं न स्वसरेषु धेनव इन्द्रं गीर्भिर्नवामहे ॥

तम् । वः । दस्मम् । ऋतीषहम् । ऋति । सहम् । वसोः । मन्दानम् । अन्धसः । अभि । वत्सम् । न । स्वसरेषु । धेनवः । इन्द्रम् । गीर्भिः । नवामहे ॥२३६॥

Samveda - Mantra Number : 236
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 5;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 1;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(वः) हे उपासको! तुम्हारे और हमारे (ऋतीषहम्) निन्दनीय भावनाओं को अभिभूत करने वाले (वसोः—अन्धसः) हमारे अन्दर वसे उपासनारस से (मन्दानम्) हम पर हर्षित होने वाले (दस्मम्) दर्शनीय “दस दर्शने” [चुरा॰] (तम्-इन्द्रम्) उस ऐश्वर्यवान् परमात्मा को (गीर्भिः) वाणियों—स्तुतियों से (अभि नवामहे) तुम हम सब प्रशंसित करते हैं—उसका रुचि से स्मरण-चिन्तन करते हैं (स्वसरेषु धेनवः-वत्सं न) गोसदनों में आ जाने पर दूध देने वाली गायें बछड़े का जैसे रुचि से स्मरण करती हैं “स्वसराणि गृहाणि” [निघं॰ ३.४]।
Essence
परमात्मा हम सब उपासकों से निन्दनीय भावनाओं को दूर करने वाला है और दर्शनीय है हमारे अन्दर बसे हुए उपासनारस से जब हम उसे अर्पित करते हैं तो वह हम पर हर्षित होते हैं तथा हमें भी हर्ष प्रदान करते हैं उस ऐसे परमात्मा को अपनी स्तुति वाणियों से प्रशंसित करते हैं—स्मरण करते हैं—जैसे दूध देने वाली गायें अपने बछड़े को गोसदनों में रुचि से स्मरण करती हैं॥४॥
Footnote
[*18. “नोधा नवनं दधाति” [नि॰ ४.१६]।]
Special
ऋषिः—नोधाः (नवन-स्तवन का धारक उपासक*18)॥