Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 231

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- विश्वामित्रो गाथिनोऽभीपाद् उदलो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
ए꣡न्द्र꣢ पृ꣣क्षु꣡ कासु꣢꣯ चिन्नृ꣣म्णं꣢ त꣣नू꣡षु꣢ धेहि नः । स꣡त्रा꣢जिदुग्र꣣ पौ꣡ꣳस्य꣢म् ॥२३१

आ꣢ । इ꣣न्द्र । पृक्षु꣢ । का꣡सु꣢꣯ । चि꣣त् । नृम्ण꣢म् । त꣣नू꣡षु꣢ । धे꣣हि । नः । स꣡त्रा꣢꣯जित् । स꣡त्रा꣢꣯ । जि꣣त् । उग्र । पौँ꣡स्य꣢꣯म् ॥२३१॥

Mantra without Swara
एन्द्र पृक्षु कासु चिन्नृम्णं तनूषु धेहि नः । सत्राजिदुग्र पौꣳस्यम् ॥२३१

आ । इन्द्र । पृक्षु । कासु । चित् । नृम्णम् । तनूषु । धेहि । नः । सत्राजित् । सत्रा । जित् । उग्र । पौँस्यम् ॥२३१॥

Samveda - Mantra Number : 231
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 4;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 12;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
पदार्थ—(सत्राजित्-उग्र) हे सत्यस्वरूप से जीतनेवाले “सत्रा सत्यनाम” [निघं॰ ३.१०] या सबको वश में करने वाले “सर्वं वै सत्रम्” [श॰ ४.६.१.२५] तेजस्वी (इन्द्र) ऐश्वर्यवन् परमात्मन्! (कासु चित् पृक्षु) किन्हीं अभीष्ट संयमन क्रियाओं में उन्हें साधने के लिये “पृच् संयमने” [चुरादि॰] (नः) हमारे (तनूषु) देहों में (पौंस्यम्-नृम्णम्-आ धेहि) आत्मीय बल—आत्मबल का आधान कर “नृम्णं बलनाम” [निघं॰ २.९]।
Essence
सत्यस्वरूप सबको जीतने वाले या सब जड़ जङ्गम को स्ववश करने वाले तेजस्वी ऐश्वर्यवन् परमात्मन्! किन्हीं संयम क्रियाओं के—निमित्त हमारी देहों में आत्मबल का आधान कर जिससे अपने जीवन को संसार सम्पर्क से ऊँचे उठा तेरी ओर चलें॥९॥
Special
ऋषिः—विश्वामित्रो गाथिनोभीपाद उदलो वा (सर्वमित्र वेदाचार्य या सब भीतियों—भयों को पाद के नीचे करके ऊपर गतिशील दृढ़ निश्चयी)॥