Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 226

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- विश्वामित्रो गाथिनः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
इ꣡न्द्र꣢ उ꣣क्थे꣢भि꣣र्म꣡न्दि꣢ष्ठो꣡ वा꣡जा꣢नां च꣣ वा꣡ज꣢पतिः । ह꣡रि꣢वान्त्सु꣣ता꣢ना꣣ꣳ स꣡खा꣢ ॥२२६

इ꣡न्द्रः꣢꣯ । उ꣣क्थे꣡भिः꣢ । म꣡न्दि꣢꣯ष्ठः । वा꣡जा꣢꣯नाम् । च꣣ । वा꣡ज꣢꣯पतिः । वा꣡ज꣢꣯ । प꣣तिः । ह꣡रि꣢꣯वान् । सु꣣ता꣢ना꣢म् । स꣡खा꣢꣯ । स । खा꣣ ॥२२६॥

Mantra without Swara
इन्द्र उक्थेभिर्मन्दिष्ठो वाजानां च वाजपतिः । हरिवान्त्सुतानाꣳ सखा ॥२२६

इन्द्रः । उक्थेभिः । मन्दिष्ठः । वाजानाम् । च । वाजपतिः । वाज । पतिः । हरिवान् । सुतानाम् । सखा । स । खा ॥२२६॥

Samveda - Mantra Number : 226
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 4;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 12;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(इन्द्र) ऐश्वर्यवान् परमात्मा (उक्थेभिः) प्रार्थना वचनों से (मन्दिष्ठः) हमें अतिशय से आनन्द देने वाला है या अत्यन्त अर्चनीय है “कर्मणि कर्तृप्रत्ययश्छान्दसः” (च) और (वाजानाम्) समस्त वाजों—अन्न बल ज्ञानों का (वाजपतिः) अन्न बल ज्ञान का स्वामी है (सुतानां सखा) “सुतवताम्-अकारो मत्वर्धीयः” उपासनारस वाले उपासकों का मित्र (हरिवान्) दुःखों के हरण—अपहरण बल सुखों के हरण—आहरण धर्म से युक्त है।
Essence
परमात्मा प्रार्थनावचनों से अत्यन्त आनन्दप्रद या अत्यन्त अर्चनीय, अन्न बल ज्ञानों का स्वामी, उपासनारस वाले उपासकों का मित्र दुःखापहरण सुखाहरण धर्म वाला है॥४॥
Special
ऋषिः—विश्वामित्रः (सबका मित्र तथा सब जिसके मित्र हैं ऐसा उपासक)॥