Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 212

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- वामदेवो गौतमः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
इ꣣मे꣡ त꣢ इन्द्र꣣ सो꣡माः꣢ सु꣣ता꣢सो꣣ ये꣢ च꣣ सो꣡त्वाः꣢ । ते꣡षां꣢ मत्स्व प्रभूवसो ॥२१२

इ꣣मे꣢ । ते꣣ । इन्द्र । सो꣡माः꣢꣯ । सु꣣ता꣡सः꣢ । ये । च꣣ । सो꣡त्वाः꣢꣯ । ते꣡षा꣢꣯म् । म꣣त्स्व । प्रभूवसो । प्रभु । वसो ॥२१२॥

Mantra without Swara
इमे त इन्द्र सोमाः सुतासो ये च सोत्वाः । तेषां मत्स्व प्रभूवसो ॥२१२

इमे । ते । इन्द्र । सोमाः । सुतासः । ये । च । सोत्वाः । तेषाम् । मत्स्व । प्रभूवसो । प्रभु । वसो ॥२१२॥

Samveda - Mantra Number : 212
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 2;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 10;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(प्रभूवसो-इन्द्र) संसार में प्रभू—अपनी स्वामिनी शक्तियों के बसाने वाले परमात्मन्! (ते) तेरे लिये (इमे सोमाः सुतासः) ये उपासनारस हमारे द्वारा निष्पादित हैं (च) और (ये सोत्वाः) जो उपासनारस निष्पादन किये जाने वाले हैं “कृत्यार्थे तवैकेन्केन्यत्वनः” [अष्टा॰ ३.४.१४] ‘त्वन् प्रत्ययः’ (तेषां मत्स्व) उनके प्रतीकार में—उनसे हम पर प्रसन्न हो।
Essence
संसार में अपनी स्वामिनी शक्तियों को बसाने वाले परमात्मन्! हमारे द्वारा जो उपासनारस निष्पन्न किए हैं या किये जाने वाले हैं उनके द्वारा तू हम पर प्रसन्न हो जिससे हम आगे-आगे बढ़ते हुए तेरे साथ समागम लाभ लेते रहें॥९॥
Special
ऋषिः—वामदेवः (वननीय—उपासनीय देव वाला)॥