Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 208

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- सुकक्ष आङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
श्रु꣣तं꣡ वो꣢ वृत्र꣣ह꣡न्त꣢मं꣣ प्र꣡ शर्धं꣢꣯ चर्षणी꣣ना꣢म् । आ꣣शि꣢षे꣣ रा꣡ध꣢से म꣣हे꣢ ॥२०८॥

श्रु꣣त꣢म् । वः꣣ । वृत्रह꣡न्त꣢मम् । वृ꣣त्र । ह꣡न्त꣢꣯मम् । प्र । श꣡र्ध꣢꣯म् । च꣣र्षणीना꣢म् । आ꣣शि꣡षे꣣ । आ꣣ । शि꣡षे꣢꣯ । रा꣡ध꣢꣯से । म꣣हे꣢ ॥२०८॥

Mantra without Swara
श्रुतं वो वृत्रहन्तमं प्र शर्धं चर्षणीनाम् । आशिषे राधसे महे ॥

श्रुतम् । वः । वृत्रहन्तमम् । वृत्र । हन्तमम् । प्र । शर्धम् । चर्षणीनाम् । आशिषे । आ । शिषे । राधसे । महे ॥२०८॥

Samveda - Mantra Number : 208
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 2;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 10;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(वः-चर्षणीनाम्) तुम मनुष्यों के “चर्षणयः-मनुष्यनाम” [निघं॰ २.३] (आशिषे) इच्छा कामनापूर्ति के लिए तथा (महे राधसे) मोक्षरूप महान् ऐश्वर्य की सिद्धि के लिये केवल इन्द्र परमात्मा है अतः उस (श्रुतम्) प्रसिद्ध विख्यात—(वृत्रहन्तमम्) पाप भावना नाशक—आवरक हन्ता—(शर्धम्) बलवान् इन्द्र परमात्मा को “मत्वर्थीयोऽ-कारश्छान्दसः” (प्र) प्रार्थित करो “उपसर्गाद् योग्यक्रियाध्याहारः”।
Essence
मनुष्यो! तुम अपनी इच्छा कामनाओं की पूर्ति एवं महान् ऐश्वर्य सिद्धि अर्थात् मोक्षप्राप्ति के लिये पापभावनाविनाशक विध्वंसक बलवान् प्रसिद्ध इन्द्र परमात्मा की प्रार्थना किया करो॥५॥
Special
ऋषिः—सुकक्षः (शोभन कक्ष अध्यात्म कक्षा में रहने वाला)॥