Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 196

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- वामदेवो गौतमः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
स꣡दा꣢ व꣣ इ꣢न्द्र꣣श्च꣡र्कृ꣢ष꣣दा꣢꣫ उपो꣣ नु꣡ स स꣢꣯प꣣र्य꣢न् । न꣢ दे꣣वो꣢ वृ꣣तः꣢꣫ शूर꣣ इ꣡न्द्रः꣢ ॥१९६

स꣡दा꣢꣯ । वः꣣ । इ꣡न्द्रः꣢꣯ । च꣡र्कृ꣢꣯षत् । आ । उ꣡प꣢꣯ । उ꣣ । नु꣢ । सः । स꣣पर्य꣢न् । न । दे꣣वः꣢ । वृ꣣तः꣢ । शू꣡रः꣢꣯ । इ꣡न्द्रः꣢꣯ ॥१९६॥

Mantra without Swara
सदा व इन्द्रश्चर्कृषदा उपो नु स सपर्यन् । न देवो वृतः शूर इन्द्रः ॥१९६

सदा । वः । इन्द्रः । चर्कृषत् । आ । उप । उ । नु । सः । सपर्यन् । न । देवः । वृतः । शूरः । इन्द्रः ॥१९६॥

Samveda - Mantra Number : 196
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 9;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(इन्द्रः) ऐश्वर्यवान् परमात्मा (वः) तुम मनुष्यों को (सदा) सभी कालों में (आचर्कृषत्) आकर्षित करता है (सः) वह (नु) हाँ शीघ्र (उप-उ-सपर्यन् न) समीप में ही परिचर्या कराता हुआ सा (शूरः-देवः-इन्द्रः-वृतः) शूर—पापसंहारक शुभ गुणदाता इन्द्र परमात्मा वरण किया जाना चाहिए।
Essence
हे सज्जनो! परमात्मा पापों का संहारक गुणों का दाता वरण किया हुआ—स्वीकार किया हुआ सदा तुम्हें अपनी ओर आकर्षित करता है अपने समीप लेकर परिचर्या कराने जैसा व्यवहार करता हुआ वर्तमान रहता है॥३॥
Special
ऋषिः—वामदेवः (वननीय—सेवनीय—उपास्य देव जिसका है वह परमात्मा का अनन्य उपासक)॥