Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 194

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- प्रगाथः काण्वः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
उ꣡त्त्वा꣢ मन्दन्तु꣣ सो꣡माः꣢ कृणु꣣ष्व꣡ राधो꣢꣯ अद्रिवः । अ꣡व꣢ ब्रह्म꣣द्वि꣡षो꣢ जहि ॥१९४॥

उ꣢त् । त्वा꣣ । मन्दन्तु । सो꣡माः꣢꣯ । कृ꣣णुष्व꣢ । रा꣡धः꣢꣯ । अ꣣द्रिवः । अ । द्रिवः । अ꣡व꣢꣯ । ब्र꣣ह्मद्वि꣡षः꣢ । ब्र꣣ह्म । द्वि꣡षः꣢꣯ । ज꣣हिः ॥१९४॥

Mantra without Swara
उत्त्वा मन्दन्तु सोमाः कृणुष्व राधो अद्रिवः । अव ब्रह्मद्विषो जहि ॥

उत् । त्वा । मन्दन्तु । सोमाः । कृणुष्व । राधः । अद्रिवः । अ । द्रिवः । अव । ब्रह्मद्विषः । ब्रह्म । द्विषः । जहिः ॥१९४॥

Samveda - Mantra Number : 194
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 9;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(अद्रिवः) हे अद्रिवन्-आनन्दघनवन्—आनन्द बरसाने वाले परमात्मन्! (त्वा) तुझे (सोमाः) हमारे द्वारा निष्पादित—विविध उपासनारस (उत्-मदन्तु) हमारी ओर उद्धर्षित करें—उल्लसित करें, इस प्रकार कि तू (राधः कृणुष्व) समृद्ध करने वाले धन को प्रदान कर (ब्रह्मद्विषः-अवजहि) तुझ ब्रह्म से द्वेष करने वाले तुझसे विमुख करने वाले नास्तिक विचार या मुझे ब्रह्म—ब्राह्मणत्व पद पाने के विरोधी नास्तिकपने को दबा दें।
Essence
हे आनन्द घन वाले परमात्मन्! मेरे विविध उपासनारस तुझे मेरी ओर उल्लसित करें उल्लास पूर्ण करें, जिससे तू समृद्ध करने वाले ऐश्वर्य मोक्षैश्वर्य को प्रदान करे तथा तेरी ओर आने में बाधक को मुझे ब्राह्मण बनने में विरोधी नास्तिक विचार को हटा दें॥१॥
Special
ऋषिः—प्रगाथः (प्रकृष्ट गाथा—वाणी—स्तुति जिसकी है ऐसा उपासक)॥