Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 191

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- इरिम्बिठिः काण्वः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
आ꣡ या꣢हि सुषु꣣मा꣢꣫ हि त꣣ इ꣢न्द्र꣣ सो꣢मं꣣ पि꣡बा꣢ इ꣣म꣢म् । ए꣢꣫दं ब꣣र्हिः꣡ स꣢दो꣣ म꣡म꣢ ॥१९१॥

आ꣢ । या꣣हि । सुषुम꣢ । हि । ते꣣ । इ꣡न्द्र꣢꣯ । सो꣡म꣢꣯म् । पि꣡ब꣢꣯ । इ꣣म꣢म् । आ । इ꣣द꣢म् । ब꣣र्हिः꣢ । स꣣दः । म꣡म꣢꣯ ॥१९१॥

Mantra without Swara
आ याहि सुषुमा हि त इन्द्र सोमं पिबा इमम् । एदं बर्हिः सदो मम ॥

आ । याहि । सुषुम । हि । ते । इन्द्र । सोमम् । पिब । इमम् । आ । इदम् । बर्हिः । सदः । मम ॥१९१॥

Samveda - Mantra Number : 191
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 5;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 8;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(इन्द्र) ऐश्वर्यवन् परमात्मन्! तू (आ याहि) आजा (ते) तेरे लिए (सोमं सुषुम हि) उपासनारस को हम सम्पादन करते हैं (इमं-पिब) इसको पान कर—स्वीकार कर (मम-इदं बर्हिः) मेरे इस हृदयाकाश में “बर्हिः-अन्तरिक्षम्” [निघं॰ १.३] (इदम्-आसदः) इस पर बैठ।
Essence
परमात्मा के लिये उपासनारस तैयार करना उसे स्वीकार करने को आग्रह करना अपने हृदयाकाश में समन्तरूप से बिठाना चाहिए॥७॥
Special
ऋषिः—इरिम्बिठः (बिठ—अन्तरिक्ष—हृदयाकाश में मन की प्रवृत्ति करनेवाला)॥