Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 1831

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- अवत्सारः काश्यपः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ꣣ग्नि꣢꣫र्ज्योति꣣र्ज्यो꣡ति꣢र꣣ग्नि꣢꣫रिन्द्रो꣣ ज्यो꣢ति꣣र्ज्यो꣢ति꣣रि꣡न्द्रः꣢ । सू꣢र्यो꣣ ज्यो꣢ति꣣र्ज्यो꣢तिः꣣ सू꣡र्यः꣢ ॥१८३१

अ꣣ग्निः꣢ । ज्यो꣡तिः꣢꣯ । ज्यो꣡तिः꣢꣯ । अ꣣ग्निः꣢ । इ꣡न्द्रः꣢꣯ । ज्यो꣡तिः꣢꣯ । ज्यो꣡तिः꣢꣯ । इ꣡न्द्रः꣢꣯ । सू꣡र्यः꣢꣯ । ज्यो꣡तिः꣢꣯ । ज्यो꣡तिः꣢꣯ । सू꣡र्यः꣢꣯ ॥१८३१॥

Mantra without Swara
अग्निर्ज्योतिर्ज्योतिरग्निरिन्द्रो ज्योतिर्ज्योतिरिन्द्रः । सूर्यो ज्योतिर्ज्योतिः सूर्यः ॥१८३१

अग्निः । ज्योतिः । ज्योतिः । अग्निः । इन्द्रः । ज्योतिः । ज्योतिः । इन्द्रः । सूर्यः । ज्योतिः । ज्योतिः । सूर्यः ॥१८३१॥

Samveda - Mantra Number : 1831
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 9; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 20; Khand » 6;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(अग्निः-ज्योतिः) पृथिवी स्थानी अग्नि ज्योति है (ज्योतिः-अग्निः) वह ज्योतिःस्वरूप परमात्मा है वही आग्नेय शक्ति उसमें देता है४ (इन्द्रः-ज्योतिः) मध्यस्थानी विद्युत् ज्योति है (ज्योतिः-इन्द्रः) वह ज्योतिःस्वरूप परमात्मा है वही उसमें चमक देता है (सूर्यः-ज्योतिः) द्युस्थानी सूर्य ज्योति है (ज्योतिः-सूर्यः) वह ज्योतिःस्वरूप परमात्मा है उसकी ज्योति से सूर्य प्रकाशित होता है॥१॥
Special
ऋषिः—अवत्सारो वत्सप्रीर्वा (रक्षा करते हुए परमात्मा के अनुसार चलनेवाला या वक्ता बन परमात्मा को प्रसन्न करने वाला उपासक)॥ देवता—अग्निः (अग्रणेता परमात्मा)॥ छन्दः—गायत्री॥