Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 1812

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- जमदग्निर्भार्गवः Chhand- द्विपदा गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ꣡सृ꣢ग्रं दे꣣व꣡वी꣢तये वाज꣣य꣢न्तो꣣ र꣡था꣢ इव ॥१८१२॥

अ꣡सृ꣢꣯ग्रम् । दे꣣व꣡वी꣢तये । दे꣣व꣢ । वी꣣तये । वाजय꣡न्तः꣢ । र꣡थाः꣢꣯ । इ꣣व ॥१८१२॥

Mantra without Swara
असृग्रं देववीतये वाजयन्तो रथा इव ॥

असृग्रम् । देववीतये । देव । वीतये । वाजयन्तः । रथाः । इव ॥१८१२॥

Samveda - Mantra Number : 1812
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 9; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 20; Khand » 4;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(वाजयन्तः) उपासक के लिये अमृत अन्नभोग को चाहता हुआ३ परमात्मा (देववीतये) मुक्तात्माओं की तृप्ति जिसमें हो जाती है उस मुक्ति के लिये४ (असृग्रन्) धारारूप में प्राप्त होता है (रथाः-इव) रथों के समान जैसे रथ प्रवाहरूप से गति करता है तू भी कर॥३॥
Special