Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 181

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- वामदेवो गौतमः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
आ꣡ तू꣢꣯ न इन्द्र वृत्रहन्न꣣स्मा꣢क꣣म꣢र्ध꣣मा꣡ ग꣢हि । म꣣हा꣢न्म꣣ही꣡भि꣢रू꣣ति꣡भिः꣢ ॥१८१॥

आ꣢ । तु । नः꣣ । इन्द्र । वृत्रहन् । वृत्र । हन् । अस्मा꣡क꣢म् । अ꣡र्ध꣢꣯म् । आ । ग꣣हि । महा꣢न् । म꣣ही꣡भिः꣢ । ऊ꣣ति꣡भिः꣢ ॥१८१॥

Mantra without Swara
आ तू न इन्द्र वृत्रहन्नस्माकमर्धमा गहि । महान्महीभिरूतिभिः ॥

आ । तु । नः । इन्द्र । वृत्रहन् । वृत्र । हन् । अस्माकम् । अर्धम् । आ । गहि । महान् । महीभिः । ऊतिभिः ॥१८१॥

Samveda - Mantra Number : 181
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 4;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 7;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(वृत्रहन्-इन्द्र) हे पापविनाशक ऐश्वर्यवन् परमात्मन्! तू (महान्) महान् है—स्वरूपतः और उपकारक गुणों से महान् है, अतः (अस्माकम्-अर्द्धम्) हमारे पास या हमारे घर (तु-आ) शीघ्र आ, परन्तु साधारणरूप से नहीं किन्तु (महीभिः-ऊतिभिः-आगहि) महती—रक्षाकरणशक्तियों के साथ आ जा।
Essence
पापनाशक परमात्मन्! हमारे पास या हमारे स्थान हृदयगृह में आ, हम जानते हैं तू आमन्त्रित करने पर आता है परन्तु हमारे प्रेम आग्रह मात्र से या साधारणरूप में ही नहीं किन्तु अपनी रक्षा शक्तियों से आया करता है—तब हम निर्भय रहते हैं॥७॥
Special
ऋषिः—वामदेवः (वननीय धारणीय परमात्मदेव जिसका है ऐसा उपासक)॥