Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 1772

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- प्रियमेध आङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
तु꣡वि꣢शुष्म꣣ तु꣡वि꣢क्रतो꣣ श꣡ची꣢वो꣣ वि꣡श्व꣢या मते । आ꣡ प꣢प्राथ महित्व꣣ना꣢ ॥१७७२॥

तु꣡वि꣢꣯शुष्म । तु꣡वि꣢꣯ । शु꣣ष्म । तु꣡वि꣢꣯क्रतो । तु꣡वि꣢꣯ । क्र꣣तो । श꣡ची꣢꣯वः । वि꣡श्व꣢꣯या । म꣣ते । आ꣢ । प꣣प्राथ । महित्वना꣢ ॥१७७२॥

Mantra without Swara
तुविशुष्म तुविक्रतो शचीवो विश्वया मते । आ पप्राथ महित्वना ॥

तुविशुष्म । तुवि । शुष्म । तुविक्रतो । तुवि । क्रतो । शचीवः । विश्वया । मते । आ । पप्राथ । महित्वना ॥१७७२॥

Samveda - Mantra Number : 1772
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 9; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 20; Khand » 1;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(तुविशुष्म) हे बहुत६ बल वाले७ (तुविक्रतो) बहुत कर्म—असंख्यात कर्म८ जिसके हैं ऐसे (शचीवः) प्रज्ञा वाले९ (मते) मेधावी१० परमात्मन् (विश्वया महित्वना) विश्व को प्राप्त होने वाली—व्यापने वाली महिमा से (आ पप्राथ) समन्तरूप में प्रसारित हो—व्याप्त प्राप्त हो॥२॥
Special