Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 1763

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- अवत्सारः काश्यपः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
स꣡ म꣢र्मृजा꣣न꣢ आ꣣यु꣢भि꣣रि꣢भो꣣ रा꣡जे꣢व सुव्र꣣तः꣢ । श्ये꣣नो꣡ न वꣳसु꣢꣯ षीदति ॥१७६३॥

सः꣢ । म꣣र्मृजानः꣢ । आ꣣यु꣡भिः꣢ । इ꣡भः꣢꣯ । रा꣡जा꣢꣯ । इ꣣व । सुव्रतः꣢ । सु꣣ । व्रतः꣢ । श्ये꣣नः꣢ । न । व꣡ꣳसु꣢꣯ । सी꣣दति ॥१७६३॥

Mantra without Swara
स मर्मृजान आयुभिरिभो राजेव सुव्रतः । श्येनो न वꣳसु षीदति ॥

सः । मर्मृजानः । आयुभिः । इभः । राजा । इव । सुव्रतः । सु । व्रतः । श्येनः । न । वꣳसु । सीदति ॥१७६३॥

Samveda - Mantra Number : 1763
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 8; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 19; Khand » 5;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(सः) वह परमात्मा (इभः) स्वयं भयरहित तथा उपासकों की भयरहित शरण४ (राजा-इव) राजा के समान (सुव्रतः) श्रेष्ठ कर्मवान् (आयुभिः-मर्मृजानः) उपासकजनों५ द्वारा स्तुति करके भूषित पूजित किया जाता हुआ (श्येनः न वंसु-सीदति) शंसनीय गति वाले पक्षी के समान सम्भागी—सम्भजन करने वाले उपासक आत्मा में विराजमान होता है॥३॥
Special