Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 173

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- श्रुतकक्षः सुकक्षो वा आङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
भ꣣द्रं꣡भ꣢द्रं न꣣ आ꣢ भ꣣रे꣢ष꣣मू꣡र्ज꣢ꣳ शतक्रतो । य꣡दि꣢न्द्र मृ꣣ड꣡या꣢सि नः ॥१७३॥

भ꣣द्र꣡म्भ꣢द्रं । भ꣣द्रम् । भ꣣द्रम् । नः । आ꣢ । भ꣣र । इ꣡ष꣢꣯म् । ऊ꣡र्ज꣢꣯म् । श꣣तक्रतो । शत । क्रतो । य꣢त् । इ꣣न्द्र । मृड꣡या꣢सि । नः꣣ ॥१७३॥

Mantra without Swara
भद्रंभद्रं न आ भरेषमूर्जꣳ शतक्रतो । यदिन्द्र मृडयासि नः ॥

भद्रम्भद्रं । भद्रम् । भद्रम् । नः । आ । भर । इषम् । ऊर्जम् । शतक्रतो । शत । क्रतो । यत् । इन्द्र । मृडयासि । नः ॥१७३॥

Samveda - Mantra Number : 173
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 3;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 6;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(शतक्रतो-इन्द्र) हे बहुत प्रज्ञा और कर्म वाले परमात्मन्! तू (नः) हमारे लिये (भद्रं भद्रम्) कल्याण कल्याण—सर्वथा कल्याण (इषम्) अदनीय अन्न “इषम्-अन्नम्” [निघं॰ २.७] (ऊर्जम्) रस को “ऊर्ग् वै रसः” [मै॰ ३.१०.४] (आभर) प्राप्त करा (यत्) यतः क्योंकि (नः-मृडयासि) तू हमें सुखी किया करता है।
Essence
बहुत प्रज्ञा और कर्म शक्ति धारने वाले परमात्मन्! तू हमारे लिये कल्याणकारी अन्न भोजन और रस पान प्राप्त करा, यह प्रार्थना करते हैं, यह प्रार्थना अन्यथा नहीं किन्तु योग्य है क्योंकि तू हमें सुखी करता है॥९॥
Special
ऋषिः—श्रुतकक्षः (सुन लिया अध्यात्मकक्ष जिसने ऐसा उपासक)॥