Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 1729

1875 Mantra
Devata- अश्विनौ Rishi- प्रस्कण्वः काण्वः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
या꣢ द꣣स्रा꣡ सिन्धु꣢꣯मातरा मनो꣣त꣡रा꣢ रयी꣣णा꣢म् । धि꣣या꣢ दे꣣वा꣡ व꣢सु꣣वि꣡दा꣢ ॥१७२९॥

या꣢ । द꣣स्रा꣢ । सि꣡न्धु꣢꣯मातरा । सि꣡न्धु꣢꣯ । मा꣣तरा । मनोत꣡रा꣢ । र꣣यीणा꣢म् । धि꣣या꣢ । दे꣣वा꣢ । व꣣सुवि꣡दा꣢ । वसु꣣ । वि꣡दा꣢꣯ ॥१७२९॥

Mantra without Swara
या दस्रा सिन्धुमातरा मनोतरा रयीणाम् । धिया देवा वसुविदा ॥

या । दस्रा । सिन्धुमातरा । सिन्धु । मातरा । मनोतरा । रयीणाम् । धिया । देवा । वसुविदा । वसु । विदा ॥१७२९॥

Samveda - Mantra Number : 1729
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 8; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 19; Khand » 2;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(या दस्रा) जो दर्शनीय४ (सिन्धुमातरा) स्यन्दमान उपासनारस का मान कराने वाले जिसके हैं ऐसा दोनों धर्मों युक्त (रयीणां मनोहरा) धनों के मन को धन संग्रह के मनो विचार को हराने हटाने वाला (धिया वसुविदा) ध्यान धारणा से वसाने योग्य वस्तु को प्राप्त कराने वाला (देवा) इष्टदेव उपास्य ज्योतिस्वरूप आनन्दरसरूप परमात्मा है॥२॥
Special