Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 1671

1875 Mantra
Devata- विष्णुः Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
वि꣢ष्णोः꣣ क꣡र्मा꣢णि पश्यत꣣ य꣡तो꣢ व्र꣣ता꣡नि꣢ पस्प꣣शे꣢ । इ꣡न्द्र꣢स्य꣣ यु꣢ज्यः꣣ स꣡खा꣢ ॥१६७१॥

वि꣡ष्णोः꣢꣯ । क꣡र्मा꣢꣯णि । प꣣श्यत । य꣡तः꣢꣯ । व्र꣣ता꣡नि꣢ । प꣣स्पशे । इ꣡न्द्र꣢꣯स्य । यु꣡ज्यः꣢꣯ । स꣡खा꣢꣯ । स । खा꣣ ॥१६७१॥

Mantra without Swara
विष्णोः कर्माणि पश्यत यतो व्रतानि पस्पशे । इन्द्रस्य युज्यः सखा ॥

विष्णोः । कर्माणि । पश्यत । यतः । व्रतानि । पस्पशे । इन्द्रस्य । युज्यः । सखा । स । खा ॥१६७१॥

Samveda - Mantra Number : 1671
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 8; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 18; Khand » 2;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(विष्णोः कर्माणि पश्यत) व्यापक परमात्मा के कर्मों—जगद्रचन चालन धारण जीवों के लिये भोगप्रदान कर्मानुसार फल प्रदान आदि को देखो (यतः-व्रतानि पस्रशे) जिन्हें देखकर मनुष्य अपने सङ्कल्पों आचरणों कर्त्तव्यों को स्पर्श करता है१ उसके प्रति और संसार में रहने के लिये (इन्द्रस्य युज्यः सखा) उपासक आत्मा का योग से प्राप्त होने वाला साथी मित्र है, अतः उससे योग करना चाहिए॥३॥
Special