Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 166

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
म꣣हा꣡ꣳ इन्द्रः꣢꣯ पु꣣र꣡श्च꣢ नो महि꣣त्व꣡म꣢स्तु व꣣ज्रि꣡णे꣢ । द्यौ꣡र्न प्र꣢꣯थि꣣ना꣡ शवः꣢꣯ ॥१६६॥

म꣣हा꣢न् । इ꣡न्द्रः꣢꣯ । पु꣣रः꣢ । च꣣ । नः । महित्व꣢म् । अ꣣स्तु । वज्रि꣡णे꣢ । द्यौः । न । प्र꣣थिना꣢ । श꣡वः꣢꣯ ॥१६६॥

Mantra without Swara
महाꣳ इन्द्रः पुरश्च नो महित्वमस्तु वज्रिणे । द्यौर्न प्रथिना शवः ॥

महान् । इन्द्रः । पुरः । च । नः । महित्वम् । अस्तु । वज्रिणे । द्यौः । न । प्रथिना । शवः ॥१६६॥

Samveda - Mantra Number : 166
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 3;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 6;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(इन्द्रः) ऐश्वर्यवान् परमात्मा (महान्) सर्वमहान् है (पुरः-च) अतएव वह प्रत्येक के सम्मुख भी है जब सबसे महान् सर्वत्र है तो मेरे सामने भी होना ही है (द्यौः-न प्रथिना शवः) द्यौ—द्युलोक की भाँति विस्तृत या फैला हुआ उसका बल—व्यापन बल है, उस ऐसे (वज्रिणे नः-महित्वम्-अस्तु) सर्वविध वज्रशक्ति वाले के लिए हमारा महिमा गुणगान हो।
Essence
परमात्मा सर्वमहान् है अतएव प्रत्येक के सम्मुख भी वह द्युलोक के समान विस्तृत व्याप्ति वाला है उस वज्र शासन वाले परमात्मा के लिए महिमा—गुणगान हमारे द्वारा होता रहे॥२॥
Special
ऋषिः—मधुच्छन्दाः (मीठी इच्छा वाला, मधु परायण)॥