Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 1654

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- शुनःशेप आजीगर्तिः Chhand- एकपदा पङ्क्तिः Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
सु꣣म꣢न्मा꣣ व꣢स्वी꣣ र꣡न्ती꣢ सू꣣न꣡री꣢ ॥१६५४

सु꣣म꣡न्मा꣢ । सु꣣ । म꣡न्मा꣢꣯ । व꣡स्वी꣢꣯ । र꣡न्ती꣢꣯ । सू꣣न꣡री꣢ । सु꣣ । न꣡री꣢꣯ ॥१६५४॥

Mantra without Swara
सुमन्मा वस्वी रन्ती सूनरी ॥१६५४

सुमन्मा । सु । मन्मा । वस्वी । रन्ती । सूनरी । सु । नरी ॥१६५४॥

Samveda - Mantra Number : 1654
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 8; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 17; Khand » 4;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(सुमन्मा) उपासक के लिये परमात्मा शोभन ज्ञान वाला (वस्वी) वासधन देने वाला (रन्ती) रमणीय सुख वाला (सूनरी) शोभन नीति वाला—शोभन नेता है॥१॥
Special
ऋषिः—आजीगर्तः शुनःशेपः (इन्द्रियभोगों की दौड़ में शरीर गर्त में गिरा उत्थान का इच्छुक)॥ देवता—इन्द्राग्नी (ऐश्वर्यवान् एवं अग्रणायक परमात्मा)॥ छन्दः—एकपदा विराट्॥