Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 1644

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- श्रुतकक्षः सुकक्षो वा आङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
शि꣡क्षा꣢ ण इ꣣न्द्र꣢꣫ राय आ पु꣣रु꣢ वि꣣द्वा꣡ꣳ ऋ꣡चीषम । अ꣡वा꣢ नः꣣ पा꣢र्ये꣣ ध꣡ने꣢ ॥१६४४॥

शि꣡क्ष꣢꣯ । नः꣣ । इन्द्र । रायः꣢ । आ । पु꣣रु꣢ । वि꣣द्वा꣢न् । ऋ꣣चीषम । अ꣡व꣢꣯ । नः꣣ । पा꣡र्ये꣢꣯ । ध꣡ने꣢꣯ ॥१६४४॥

Mantra without Swara
शिक्षा ण इन्द्र राय आ पुरु विद्वाꣳ ऋचीषम । अवा नः पार्ये धने ॥

शिक्ष । नः । इन्द्र । रायः । आ । पुरु । विद्वान् । ऋचीषम । अव । नः । पार्ये । धने ॥१६४४॥

Samveda - Mantra Number : 1644
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 8; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 17; Khand » 3;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(ऋचीषम-इन्द्र) हे ऋचों मन्त्रों के प्राप्त करानेवाले या ऋचों-मन्त्रों के दर्शन७ ज्ञान कराने वाले परमात्मन् (नः) हमें (रायः) ज्ञानधन (पुरु) बहुत (शिक्षा) दे प्रदान कर८ (विद्वान्) ज्ञानधनों का स्वामी या ज्ञाता है, अतः (नः पार्ये धने-आ-अव) पर—परधाममोक्ष प्राप्त कराने में समर्थ स्वदर्शन धन के अन्दर हमें समन्तरूप से रख॥३॥
Special