Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 164

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
आ꣢꣫ त्वेता꣣ नि꣡ षी꣢द꣣ते꣡न्द्र꣢म꣣भि꣡ प्र गा꣢꣯यत । स꣡खा꣢यः꣣ स्तो꣡म꣢वाहसः ॥१६४॥

आ꣢ । तु । आ । इ꣣त । नि꣢ । सी꣣दत । इ꣡न्द्र꣢꣯म् । अ꣣भि꣢ । प्र । गा꣣यत । स꣡खा꣢꣯यः । स । खा꣣यः । स्तो꣡म꣢꣯वाहसः । स्तो꣡म꣢꣯ । वा꣣हसः ॥१६४॥

Mantra without Swara
आ त्वेता नि षीदतेन्द्रमभि प्र गायत । सखायः स्तोमवाहसः ॥

आ । तु । आ । इत । नि । सीदत । इन्द्रम् । अभि । प्र । गायत । सखायः । स । खायः । स्तोमवाहसः । स्तोम । वाहसः ॥१६४॥

Samveda - Mantra Number : 164
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 2;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 5;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(स्तोमवाहसः सखायः) हे स्तवन गान को बहाने वाले गायक स्तुतिकर्ता उपासक मित्रो! (आ-इत-तु-आ) आओ तो आओ—अवश्य आओ शीघ्र आओ आ—आकर (निषीदत) नियतरूप से बैठो—श्रद्धा स्नेह से बैठो (इन्द्रम्-अभिप्रगायत) सर्वैश्वर्य—सम्पन्न परमात्मा को लक्षित कर उसके गुणगान करो।
Essence
परमात्मा की स्तुति को प्रवाहित करने वाले उपासक सखा जन सामूहिक स्तवन का तान्ता बिठाने वाले एकत्र श्रद्धा स्नेह से बैठकर परमात्मा के गुणगान करें तो आनन्द का प्रवाह प्रवाहित हो जावे॥१०॥
Special
ऋषिः—मधुच्छन्दाः (मीठी इच्छा वाला मधुपरायण जन)॥