Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 1631

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- रेभसूनू काश्यपौ Chhand- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
अ꣡ध꣢ क्ष꣣पा꣡ परि꣢꣯ष्कृतो꣣ वा꣡जा꣢ꣳ अ꣣भि꣡ प्र गा꣢꣯हसे । य꣡दी꣢ वि꣣व꣡स्व꣢तो꣣ धि꣢यो꣣ ह꣡रि꣢ꣳ हि꣣न्व꣢न्ति꣣ या꣡त꣢वे ॥१६३१॥

अ꣡ध꣢꣯ । क्ष꣣पा꣢ । प꣡रि꣢꣯ष्कृतः । प꣡रि꣢꣯ । कृ꣣तः । वा꣡जा꣢꣯न् । अ꣡भि꣢ । प्र । गा꣣हसे । य꣡दि꣢꣯ । वि꣣व꣡स्व꣢तः । वि꣣ । व꣡स्व꣢꣯तः । धि꣡यः꣢꣯ । ह꣡रि꣢꣯म् । हि꣣न्व꣡न्ति꣢ । या꣡त꣢꣯वे ॥१६३१॥

Mantra without Swara
अध क्षपा परिष्कृतो वाजाꣳ अभि प्र गाहसे । यदी विवस्वतो धियो हरिꣳ हिन्वन्ति यातवे ॥

अध । क्षपा । परिष्कृतः । परि । कृतः । वाजान् । अभि । प्र । गाहसे । यदि । विवस्वतः । वि । वस्वतः । धियः । हरिम् । हिन्वन्ति । यातवे ॥१६३१॥

Samveda - Mantra Number : 1631
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 8; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 17; Khand » 2;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(क्षपा-अध) रात्रि के२ अनन्तर उषाकाल—प्रभातवेला में (परिष्कृतः) उपासक द्वारा भूषित पूजित स्तुत हुआ तू परमात्मन्! (वाजान्-अभि प्रगाहसे) अमृत अन्नभोगों को३ प्राप्त कराता है (यदी विवस्वतः-धियः) यदि उपासकजन४ की स्तुतिवाणियाँ५ (हरि यातवे हिन्वन्ति) तुझ दुःखहर्ता परमात्मा को उपासक के प्रति प्राप्त होने को प्रेरित करती हैं—खींचती हैं प्रेरणा देती हैं॥१॥
Special
ऋषिः—काश्यपौ रेभसूनू ऋषी (द्रष्टा से सम्बन्ध स्तोता और साक्षात्कर्ता उपासक)॥ देवता—पवमानः सोमः (धारारूप में प्राप्त होने वाला परमात्मा)॥ छन्दः—अनुष्टुप्॥