Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 163

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- शुनः शेप आजीगर्तिः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
यो꣡गे꣢योगे त꣣व꣡स्त꣢रं꣣ वा꣡जे꣢वाजे हवामहे । स꣡खा꣢य꣣ इ꣡न्द्र꣢मू꣣त꣡ये꣢ ॥१६३॥

यो꣡गे꣢꣯योगे । यो꣡गे꣢꣯ । यो꣣गे । तव꣡स्त꣢रम् । वा꣡जे꣢꣯वाजे । वा꣡जे꣢꣯ । वा꣣जे । हवामहे । स꣡खा꣢꣯यः । स । खा꣣यः । इ꣡न्द्र꣢म् । ऊ꣣त꣡ये꣢ ॥१६३॥

Mantra without Swara
योगेयोगे तवस्तरं वाजेवाजे हवामहे । सखाय इन्द्रमूतये ॥

योगेयोगे । योगे । योगे । तवस्तरम् । वाजेवाजे । वाजे । वाजे । हवामहे । सखायः । स । खायः । इन्द्रम् । ऊतये ॥१६३॥

Samveda - Mantra Number : 163
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 2;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 5;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(योगे योगे) योग योग—प्रत्येक सुख सम्पत्ति के संयोग पर (वाजे वाजे) वाज वाज—प्रत्येक सुख सम्पत्ति के संग्राम संघर्ष पर “वाजे संग्राम नाम” [निघं॰ २.१७] (तवस्तरम्-इन्द्रम्) अत्यन्त बलवान् परमात्मा को (ऊतये) रक्षा के लिये (सखायः-हवामहे) सखाभूत हम उपासकजन बुलाते हैं—स्मरण करते हैं।
Essence
प्रत्येक सम्पत्ति के अवसर पर तथा प्रत्येक विपत्ति के अवसर पर अति बलवान् परमात्मा का अपनी रक्षार्थ सखाभाव से स्मरण करना चाहिए जिससे सम्पत्ति में हम अभिमत्त होकर आत्महानि न कर सकें और विपत्ति पर निराश होकर आत्मग्लानि न कर सकें॥९॥
Special
ऋषिः—शुनः शेपः (इन्द्रिय भोगों की दौड़ में शरीर गर्त में गिरा आत्मकल्याण का इच्छुक)॥