Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 160

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
सु꣣रूपकृत्नु꣢मू꣣त꣡ये꣢ सु꣣दु꣡घा꣢मिव गो꣣दु꣡हे꣢ । जु꣣हूम꣢सि꣣ द्य꣡वि꣢द्यवि ॥१६०॥

सु꣣रूपकृत्नुम् । सु꣣रूप । कृत्नु꣢म् । ऊ꣣त꣡ये꣢ । सु꣣दु꣡घा꣢म् । सु꣣ । दु꣡घा꣢꣯म् । इ꣣व गोदु꣡हे꣢ । गो꣣ । दु꣡हे꣢꣯ । जु꣣हूम꣡सि꣣ । द्य꣡वि꣢꣯द्यवि । द्य꣡वि꣢꣯ । द्य꣣वि ॥१६०॥

Mantra without Swara
सुरूपकृत्नुमूतये सुदुघामिव गोदुहे । जुहूमसि द्यविद्यवि ॥

सुरूपकृत्नुम् । सुरूप । कृत्नुम् । ऊतये । सुदुघाम् । सु । दुघाम् । इव गोदुहे । गो । दुहे । जुहूमसि । द्यविद्यवि । द्यवि । द्यवि ॥१६०॥

Samveda - Mantra Number : 160
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 2;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 5;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(गोदुहे सुदुघाम्-इव) गौ का दूध दूहने के लिये सुगमता से दूहने योग्य गौ को दूहता है ऐसे (ऊतये) जीवनरक्षा—आत्मस्वरूप प्राप्ति के लिये (सुरूपकृत्नुम्) शोभन रूप करने वाले—आत्मा को संस्कृत करने वाले परमात्मा को “परं ज्योतिरुपसम्पद्य स्वेन रूपेणाभिनिष्पद्यते” [छान्दो॰ ८.३.४] (द्यवि द्यवि) प्रतिदिन (जुहूमसि) हम अपने अन्दर आदान करें—धारण करें।
Essence
सुगमता से दूहने योग्य को दूध प्राप्ति के लिये जैसे गौ को दूहा करते हैं ऐसे ही आत्मस्वरूप को शोभन बनाने वाले परमात्मा को अपनी आत्मरूपता प्राप्ति के लिये प्रतिदिन अपने अन्दर धारण करना चाहिए॥६॥
Special
ऋषिः—मधुच्छन्दाः (मीठी इच्छा वाला मधुपरायण जन)॥