Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 16

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- आग्नेयं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- आग्नेयं पर्व
Mantra with Swara
प्र꣢ति꣣ त्यं꣡ चारु꣢꣯मध्व꣣रं꣡ गो꣢पी꣣था꣢य꣣ प्र꣡ हू꣢यसे । म꣣रु꣡द्भि꣢रग्न꣣ आ꣡ ग꣢हि ॥१६॥

प्र꣡ति꣢꣯ । त्यम् । चा꣡रु꣢꣯म् । अ꣣ध्वर꣢म् । गो꣣पीथा꣡य꣢ । प्र । हू꣣यसे । मरु꣡द्भिः꣢ । अ꣣ग्ने । आ꣢ । ग꣣हि ॥१६॥

Mantra without Swara
प्रति त्यं चारुमध्वरं गोपीथाय प्र हूयसे । मरुद्भिरग्न आ गहि ॥

प्रति । त्यम् । चारुम् । अध्वरम् । गोपीथाय । प्र । हूयसे । मरुद्भिः । अग्ने । आ । गहि ॥१६॥

Samveda - Mantra Number : 16
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 2;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 2;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(त्यं चारुम्—अध्वरं प्रति) उस सुन्दर तथा हिंसा चाञ्चल्यादि-दोषरहित अध्यात्म यज्ञ के प्रति—उसके साधनार्थ (गोपीथाय) स्तुति-प्रार्थनोपसना रसरूप सोमपान करने—स्वीकार करने के लिए “गोपीथाय सोमपानाय” [निरु॰ १०.३६] (अग्ने प्रहूयसे) परमात्मन्! तू आमन्त्रित किया जा रहा है (मरुद्भिः—आगहि) अपने ज्ञानानन्दप्रकाश रश्मियों के साथ आ “मरुतः—रश्मयः” [तां॰ १४.१२.९]।
Essence
हे प्रिय परमात्मन्! यह सत्य है जब मैं हावभाव भरी स्तुति-प्रार्थनोपासना रूप सोमरस तेरे अर्पित करता हूँ तो तू आमन्त्रित हुआ मेरे सुन्दर अध्यात्म यज्ञ में आता है और अपने ज्ञानानन्द प्रकाश-गुणों के साथ आता है—मुझे ज्ञान आनन्दप्रकाश प्रसाद प्रदान करता हुआ आता है, हे वरप्रद तेरी वरद शरण पाने के लिये मेरा अध्यात्मयज्ञ चलता रहे॥६॥
Special
ऋषिः—मेधातिथिः (मेधा से परमात्मा गति प्रवृत्ति वाला)॥