Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 1596

1875 Mantra
Devata- द्यावापृथिव्यौ Rishi- वामदेवो गौतमः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
प्र꣢ वां꣣ म꣢हि꣣ द्य꣡वी꣢ अ꣣भ्यु꣡प꣢स्तुतिं भरामहे । शु꣢ची꣣ उ꣢प꣣ प्र꣡श꣢स्तये ॥१५९६॥

प्र꣢ । वा꣣म् । म꣡हि꣢꣯ । द्यवी꣢꣯इ꣡ति꣢ । अ꣣भि꣢ । उ꣡प꣢꣯स्तुतिम् । उ꣡प꣢꣯ । स्तु꣣तिम् । भरामहे । शु꣢ची꣢꣯इति । उ꣡प꣢꣯ । प्र꣡श꣢꣯स्तये । प्र । श꣣स्तये ॥१५९६॥

Mantra without Swara
प्र वां महि द्यवी अभ्युपस्तुतिं भरामहे । शुची उप प्रशस्तये ॥

प्र । वाम् । महि । द्यवीइति । अभि । उपस्तुतिम् । उप । स्तुतिम् । भरामहे । शुचीइति । उप । प्रशस्तये । प्र । शस्तये ॥१५९६॥

Samveda - Mantra Number : 1596
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 7; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 16; Khand » 3;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(द्यवी शुची वाम्-अभि) हे द्योतमान—अध्यात्मदृष्टि से प्रकाशमान और पवित्र प्रजापति—पिता और माता परमात्मन्! तुझे लक्ष्य कर (उपस्तुतिं प्र भरामहे) समीपी स्तुति समर्पित करते हैं (प्रशस्तये-उप) गुणगान करने के लिये पास जाते हैं॥१॥
Special
ऋषिः—वामदेवः (वननीय परमात्मदेव वाला उपासक)॥ देवता—द्यावापृथिव्यौ ११ (प्रकाशस्वरूप और आधार परमात्मा)॥ छन्दः—गायत्री॥