Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 159

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- इरिम्बिठिः काण्वः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
अ꣣यं꣡ त꣢ इन्द्र꣣ सो꣢मो꣣ नि꣡पू꣢तो꣣ अ꣡धि꣢ ब꣣र्हि꣡षि꣢ । ए꣡ही꣢म꣣स्य꣢꣫ द्रवा꣣ पि꣡ब꣢ ॥१५९॥

अ꣣य꣢म् । ते꣣ । इन्द्र । सो꣡मः꣢꣯ । नि꣡पू꣢꣯तः । नि । पू꣣तः । अ꣡धि꣢꣯ । ब꣣र्हि꣡षि꣢ । आ । इ꣣हि । ईम् । अस्य꣢ । द्र꣡व꣢꣯ । पि꣡ब꣢꣯ ॥१५९॥

Mantra without Swara
अयं त इन्द्र सोमो निपूतो अधि बर्हिषि । एहीमस्य द्रवा पिब ॥

अयम् । ते । इन्द्र । सोमः । निपूतः । नि । पूतः । अधि । बर्हिषि । आ । इहि । ईम् । अस्य । द्रव । पिब ॥१५९॥

Samveda - Mantra Number : 159
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 2;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 5;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(इन्द्र) हे ऐश्वर्यवन् परमात्मन्! (ते) तेरे लिये (बर्हिषि-अधि) निज हृदयावकाश में (अयं सोमः-निपूतः) यह उपासनारस निष्पन्न किया है (ईम्-एहि) इसके पास आ (अस्य द्रव पिब) इसके प्रति शीघ्र गति कर और इसे पान कर।
Essence
हे ऐश्वर्यवन् परमात्मन्! मैंने अपने हृदयावकाश में तेरे लिये उपासनारस को श्रद्धा से निष्पादित किया है तू मेरे हृदय में आ शीघ्र आकर इसका पान कर—स्वीकार कर॥५॥
Special
ऋषिः—इरिम्बिठः (अन्तरिक्ष में—हृदयाकाश में गतिवाला उपासक)॥