Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 1585

1875 Mantra
Devata- वरुणः Rishi- शुनःशेप आजीगर्तिः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
इ꣣मं꣡ मे꣢ वरुण श्रुधी꣣ ह꣡व꣢म꣣द्या꣡ च꣢ मृडय । त्वा꣡म꣢व꣣स्यु꣡रा च꣢꣯के ॥१५८५॥

इ꣣म꣢म् । मे꣣ । वरुण । श्रुधि । ह꣡व꣢꣯म् । अ꣣द्य꣢ । अ꣣ । द्य꣢ । च꣣ । मृडय । त्वा꣢म् । अ꣣वस्युः꣢ । आ । च꣣के ॥१५८५॥

Mantra without Swara
इमं मे वरुण श्रुधी हवमद्या च मृडय । त्वामवस्युरा चके ॥

इमम् । मे । वरुण । श्रुधि । हवम् । अद्य । अ । द्य । च । मृडय । त्वाम् । अवस्युः । आ । चके ॥१५८५॥

Samveda - Mantra Number : 1585
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 7; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 16; Khand » 2;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(वरुण) हे वरने योग्य परमात्मन्! (मे) मेरे (इमं हवम्) इस आमन्त्रण या प्रार्थना को (श्रुधि) सुन—स्वीकार कर (च) और (अद्य मृडय) आज—तुरन्त इसी जीवन में मुझे सुखी कर (अवस्युः) रक्षा चाहनेवाला मैं (त्वाम्-आचके) तुझे चाहता हूँ१ तेरी प्राप्ति एवं दर्शन की कामना करता हूँ॥१॥
Special
ऋषिः—आजीगर्तः शुनःशेपः (इन्द्रियभोगों की दौड़ में शरीरगर्त में गिरा उत्थान का इच्छुक)॥ देवता—वरुणः (वरनेयोग्य तथा वरनेवाला परमात्मा)॥ छन्दः—गायत्री॥