Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 157

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- मेधातिथिः काण्वः प्रियमेधश्चाङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
व꣣य꣡मु꣢ त्वा त꣣दि꣡द꣢र्था꣣ इ꣡न्द्र꣢ त्वा꣣य꣢न्तः꣣ स꣡खा꣢यः । क꣡ण्वा꣢ उ꣣क्थे꣡भि꣢र्जरन्ते ॥१५७॥

व꣣य꣢म् । उ꣣ । त्वा । तदि꣡द꣢र्थाः । त꣣दि꣢त् । अ꣣र्थाः । इ꣡न्द्र꣢꣯ । त्वा꣣य꣡न्तः꣢ । स꣡खा꣢꣯यः । स । खा꣣यः । क꣡ण्वाः꣢꣯ । उ꣣क्थे꣡भिः꣢ । ज꣣रन्ते ॥१५७॥

Mantra without Swara
वयमु त्वा तदिदर्था इन्द्र त्वायन्तः सखायः । कण्वा उक्थेभिर्जरन्ते ॥

वयम् । उ । त्वा । तदिदर्थाः । तदित् । अर्थाः । इन्द्र । त्वायन्तः । सखायः । स । खायः । कण्वाः । उक्थेभिः । जरन्ते ॥१५७॥

Samveda - Mantra Number : 157
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 2;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 5;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(इन्द्र) हे ऐश्वर्यवन् परमात्मन्! (कण्वाः) मेधावी (सखायः) तेरे मित्रजन (त्वायन्तः) तुझे चाहते हुए (उक्थेभिः) प्रशंसनीय वचनों—वैदिक स्तुत्य नामों से (जरन्ते) स्तुति में लाते हैं (वयम्-उ) हम भी (तदिदर्थाः) उस ही अर्थ—लक्ष्य को लेकर वैसे बनकर (त्वा) तुझे स्तुति में लाते हैं।
Essence
परमात्मन्! हम भी अन्य पूर्ववर्ती या अपने से ऊँचे विद्वानों की भाँति तुझे चाहते हुए वैदिक नामों द्वारा तेरी स्तुति करते हैं। अपने से ऊँचे विद्वानों को आदर्श बनाकर परमात्मा की स्तुति करनी चाहिए॥३॥
Special
ऋषिः—मेधातिथिः काण्व प्रियमेधा वा (मेधावी का शिष्य मेधा से अतन परमात्मा में प्रवेश करने वाला प्रिया मेधा जिसकी है ऐसा विद्वान्)॥