Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 156

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- वसिष्ठो मैत्रावरुणिः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
प्र꣢ व꣣ इ꣡न्द्रा꣢य꣣ मा꣡द꣢न꣣ꣳ ह꣡र्य꣢श्वाय गायत । स꣡खा꣢यः सोम꣣पा꣡व्ने꣢ ॥१५६॥

प्र꣢ । वः꣣ । इ꣡न्द्रा꣢꣯य । मा꣡द꣢꣯नम् । ह꣡र्य꣢꣯श्वाय । ह꣡रि꣢꣯ । अ꣣श्वाय । गायत । स꣡खा꣢꣯यः । स । खा꣣यः । सोमपा꣡व्ने꣢ । सो꣡म । पा꣡व्ने꣢꣯ ॥१५६॥

Mantra without Swara
प्र व इन्द्राय मादनꣳ हर्यश्वाय गायत । सखायः सोमपाव्ने ॥

प्र । वः । इन्द्राय । मादनम् । हर्यश्वाय । हरि । अश्वाय । गायत । सखायः । स । खायः । सोमपाव्ने । सोम । पाव्ने ॥१५६॥

Samveda - Mantra Number : 156
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 2;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 5;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(वः सखायः) तुम सखा जनो! (हर्यश्वाय) दुःखापहरणशील सुखाहरणशील व्यापक गुण शक्ति वाले परमात्मा (सोमपाव्ने) उपासना रस को स्वीकार करनेवाले (इन्द्राय) परमात्मा के लिये (मादनं प्रगायत) आनन्द गान गाओ, जिससे तुम्हें आनन्द प्राप्त हों।
Essence
उपासक जनो! परमात्मा के सखा—मित्र बन दुःखापहरण सुखाहरण गुण शक्तिवाले उपासना ध्यान स्वीकार करनेवाले परमात्मा के लिए आनन्दादि गुणगान करो—स्तुति ध्यान करो॥२॥
Special
ऋषिः—वसिष्ठ (परमात्मा में अत्यन्त वसने वाला उपासक)॥