Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 150

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- श्रुतकक्षः सुकक्षो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
उ꣡प꣢ नो꣣ ह꣡रि꣢भिः सु꣣तं꣢ या꣣हि꣡ म꣢दानां पते । उ꣡प꣢ नो꣣ ह꣡रि꣢भिः सु꣣त꣢म् ॥१५०॥

उ꣡प꣢꣯ । नः꣣ । ह꣡रि꣢꣯भिः । सु꣣त꣢म् । या꣣हि꣢ । म꣣दानाम् । पते । उ꣡प꣢꣯ । नः꣣ । ह꣡रि꣢꣯भिः । सु꣣त꣢म् ॥१५०॥

Mantra without Swara
उप नो हरिभिः सुतं याहि मदानां पते । उप नो हरिभिः सुतम् ॥

उप । नः । हरिभिः । सुतम् । याहि । मदानाम् । पते । उप । नः । हरिभिः । सुतम् ॥१५०॥

Samveda - Mantra Number : 150
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 4;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(मदानां पते) हे समस्त हर्षों और आनन्दों के स्वामिन्! तू (नः सुतम्) हमारे निष्पादित हावभावपूर्ण उपासनारस एवं भक्तिभाव को (हरिभिः-उप-याहि) दुःखापहरण करने वाले एवं सुखाहरण करने वाले गुणों से प्राप्त हो (नः सुतं हरिभिः-उप) हमारे निष्पादित भक्तिभाव को दुःखापहरण करने वाले सुखाहरण करने वाले गुणों से प्राप्त हो।
Essence
हर्ष सुखों के स्वामिन् परमात्मन्! तू हमारे द्वारा निष्पादित उपासनारस को दुःखापहरण करने वाले सुखाहरण करने वाले गुणों से हमें प्राप्त होता है अतः हम प्रार्थना करते हैं कि आप हमारे उपासना रस को हमारे कल्याणार्थ सेवन कीजिए॥६॥
Special
ऋषिः—श्रुतकक्षः सुकक्षो वा (अध्यात्मकक्ष जिसने सुन लिया या शोभन अध्यात्मकक्ष जिसका चल रहा है ऐसा जन)॥