Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 1463

1875 Mantra
Devata- ब्रह्मणस्पतिः Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
सो꣣मा꣢ना꣣ꣳ स्व꣡र꣢णं कृणु꣣हि꣡ ब्र꣢ह्मणस्पते । क꣣क्षी꣡व꣢न्तं꣣ य꣡ औ꣢शि꣣जः꣢ ॥१४६३॥

सो꣣मा꣡ना꣢म् । स्व꣡र꣢꣯णम् । कृ꣣णुहि꣢ । ब्र꣣ह्मणः । पते । कक्षी꣡व꣢न्तम् । यः । औ꣣शिजः꣢ ॥१४६३॥

Mantra without Swara
सोमानाꣳ स्वरणं कृणुहि ब्रह्मणस्पते । कक्षीवन्तं य औशिजः ॥

सोमानाम् । स्वरणम् । कृणुहि । ब्रह्मणः । पते । कक्षीवन्तम् । यः । औशिजः ॥१४६३॥

Samveda - Mantra Number : 1463
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 13; Khand » 4;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Footnote
(देखो अर्थव्याख्या मन्त्र संख्या १३९)
Special
ऋषिः—मेधातिथिः (परमात्मा में मेधा से अतन गमन प्रवेश करने वाला उपासक)॥ देवता—ब्रह्मणस्पतिः (वेद तथा ब्रह्माण्ड का स्वामी परमात्मा)॥ छन्दः—गायत्री॥