Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 1462

1875 Mantra
Devata- सविता Rishi- विश्वामित्रो गाथिनः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
त꣡त्स꣢वि꣣तु꣡र्व꣢꣯रेण्यं꣣ भ꣡र्गो꣢ दे꣣व꣡स्य꣢ धीमहि । धि꣢यो꣣ यो꣡ नः꣢ प्रचो꣣द꣡या꣢त् ॥१४६२॥

त꣢त् । स꣣वितुः꣢ । व꣡रे꣢꣯ण्यम् । भ꣡र्गः꣢꣯ । दे꣣व꣡स्य꣢ । धी꣣महि । धि꣡यः꣢꣯ । यः । नः꣣ । प्रचोद꣡या꣢त् । प्र꣣ । चोद꣡या꣢त् ॥१४६२॥

Mantra without Swara
तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि । धियो यो नः प्रचोदयात् ॥

तत् । सवितुः । वरेण्यम् । भर्गः । देवस्य । धीमहि । धियः । यः । नः । प्रचोदयात् । प्र । चोदयात् ॥१४६२॥

Samveda - Mantra Number : 1462
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 13; Khand » 4;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(देवस्य सवितुः) द्योतमान तथा प्रेरक११ ब्रह्मात्मा१२ महान् आत्मा परमात्मा के (तत्-वरेण्यं भर्गः) उस वरणीय—वरने योग्य तेज—ज्ञानमय तेज स्वरूप को (धीमहि) हम ध्यावें—धारण करें यह आकांक्षा है (यः-नः-धियः प्रचोदयात्) जो प्रेरक परमात्मा हमारे मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार१ चारों को अपनी ओर प्रेरित करे, हमारा मन उसका मनन करे, बुद्धि उसका विवेचन करे, चित्त उसका स्मरण करे, अहंकार उसका ममत्व करे—उसे अपनावे॥१॥
Special
ऋषिः—गाथिनो विश्वामित्रः (स्तुतिवाणी९ से प्रपूर्ण आचार्य से सम्बद्ध सर्वमित्र१० उपासक)॥ देवता—सविता (प्रेरक परमात्मा)॥ छन्दः—गायत्री॥