Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 1461

1875 Mantra
Devata- सरस्वती Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
उ꣣त꣡ नः꣢ प्रि꣣या꣢ प्रि꣣या꣡सु꣢ स꣣प्त꣡स्व꣢सा꣣ सु꣡जु꣢ष्टा । स꣡र꣢स्वती꣣ स्तो꣡म्या꣢ भूत् ॥१४६१॥

उ꣣त꣢ । नः꣢ । प्रिया꣢ । प्रि꣣या꣡सु꣢ । स꣣प्त꣡स्व꣢सा । स꣣प्त꣢ । स्व꣣सा । सु꣡जु꣢꣯ष्टा । सु । जु꣣ष्टा । स꣡र꣢꣯स्वती । स्तो꣡म्या꣢꣯ । भू꣣त् ॥१४६१॥

Mantra without Swara
उत नः प्रिया प्रियासु सप्तस्वसा सुजुष्टा । सरस्वती स्तोम्या भूत् ॥

उत । नः । प्रिया । प्रियासु । सप्तस्वसा । सप्त । स्वसा । सुजुष्टा । सु । जुष्टा । सरस्वती । स्तोम्या । भूत् ॥१४६१॥

Samveda - Mantra Number : 1461
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 13; Khand » 4;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(उत) अपि—और (नः) हमारी (प्रियासु) प्रियाओं में—प्यारी चर्चाओं में प्रिया—प्यारी चर्चा (सप्तस्वसा सुजुष्टा) अपने गायत्री आदि सात छन्दों में बैठने वाली७ शोभन सेवनीया (सरस्वती स्तोम्या भूत्) वेदवाणी८ स्तुति करने योग्य है॥१॥
Special
ऋषिः—भरद्वाजः (परमात्मा के अर्चनबल को धारण करने वाला उपासक)॥ छन्दः—गायत्री॥