Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 140

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- श्रुतकक्षः आङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
बो꣡ध꣢न्मना꣣ इ꣡द꣢स्तु नो वृत्र꣣हा꣡ भूर्या꣢꣯सुतिः । शृ꣣णो꣡तु꣢ श꣣क्र꣢ आ꣣शि꣡ष꣢म् ॥१४०॥

बो꣡ध꣢꣯न्मनाः । बो꣡ध꣢꣯त् । म꣣नाः । इ꣢त् । अ꣣स्तु । नः । वृत्रहा꣢ । वृ꣣त्र । हा꣢ । भू꣡र्या꣢꣯सुतिः । भू꣡रि꣢꣯ । आ꣣सुतिः । शृणो꣡तु꣢ । श꣣क्रः꣢ । आ꣣शि꣡ष꣢म् । आ꣣ । शि꣡ष꣢꣯म् ॥१४०॥

Mantra without Swara
बोधन्मना इदस्तु नो वृत्रहा भूर्यासुतिः । शृणोतु शक्र आशिषम् ॥

बोधन्मनाः । बोधत् । मनाः । इत् । अस्तु । नः । वृत्रहा । वृत्र । हा । भूर्यासुतिः । भूरि । आसुतिः । शृणोतु । शक्रः । आशिषम् । आ । शिषम् ॥१४०॥

Samveda - Mantra Number : 140
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 5;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 3;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(बोधन्मनाः) “बोधन्मनाः-बोधते जानाति मनोभावं यः स छान्दसः समासः” मन के भाव को जानने वाला (वृत्रहा) पापनाशक (भूर्य्यासुतिः) बहुत प्रकार की आनन्द धारा जिससे प्राप्त होती है ऐसा परमात्मा (इत्) अवश्य (नः-अस्तु) हमारा ही—है (शक्रः) वह शक्तिमान् परमात्मा (आशिषं शृणोतु) स्तुति प्रार्थना को सुने—सुनता है।
Essence
परमात्मा हम उपासकों की पापवृत्तियों को नष्ट करता मनोभाव को जानता, बहुत प्रकार की आनन्द धाराओं को प्राप्त कराता और हमारी प्रार्थनाओं को सुनता है—स्वीकार करता है॥६॥
Special
ऋषिः—श्रुतकक्षः (अध्यात्मकक्ष सुना है जिसने ऐसा कुशल उपासक)॥