Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 1350

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ꣡ग्ने꣢ सु꣣ख꣡त꣢मे꣣ र꣡थे꣢ दे꣣वा꣡ꣳ ई꣢डि꣣त꣡ आ व꣢꣯ह । अ꣢सि꣣ हो꣢ता꣣ म꣡नु꣢र्हितः ॥१३५०॥

अ꣡ग्ने꣢꣯ । सु꣣ख꣡त꣢मे । सु꣣ । ख꣡त꣢꣯मे । र꣡थे꣢꣯ । दे꣣वा꣢न् । ई꣣डितः꣢ । आ । व꣣ह । अ꣡सि꣢꣯ । हो꣡ता꣢꣯ । म꣡नु꣢꣯र्हितः । म꣡नुः꣢꣯ । हि꣡तः ॥१३५०॥

Mantra without Swara
अग्ने सुखतमे रथे देवाꣳ ईडित आ वह । असि होता मनुर्हितः ॥

अग्ने । सुखतमे । सु । खतमे । रथे । देवान् । ईडितः । आ । वह । असि । होता । मनुर्हितः । मनुः । हितः ॥१३५०॥

Samveda - Mantra Number : 1350
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 11; Khand » 1;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(अग्ने) हे अग्रणायक परमात्मन्! तू (ईडितः) स्तुति को प्राप्त हुआ (सुखतमे रथे) अत्यन्त सुखरूप रमणस्थान में मोक्ष में (देवान्-आवह) दिव्य अभौतिक सङ्कल्पात्मक मन आदि शक्तियों को समन्तरूप से प्राप्त करा८ (मनुर्हितः-होता-असि) क्योंकि तू हम उपासक मनुष्यों का हितकर होता—बुलाने वाला है॥४॥
Special
ऋषिः—मेधातिथिः (मेधा से परमात्मा में अतन गमन प्रवेश करने वाला उपासक)॥ देवता—इडः (स्तुतियोग्य परमात्मा)॥ छन्दः—गायत्री॥