Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 1349

1875 Mantra
Devata- नराशंसः Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
न꣢रा꣣श꣡ꣳस꣢मि꣣ह꣢ प्रि꣣य꣢म꣣स्मि꣢न्य꣣ज्ञ꣡ उप꣢꣯ ह्वये । म꣡धु꣢जिह्वꣳ हवि꣣ष्कृ꣡त꣢म् ॥१३४९॥

नरा꣣श꣡ꣳस꣢म् । इ꣣ह꣢ । प्रि꣣य꣢म् । अ꣣स्मि꣢न् । य꣣ज्ञे꣢ । उ꣡प꣢꣯ । ह्व꣢ये । म꣡धु꣢꣯जिह्वम् । म꣡धु꣢꣯ । जि꣣ह्वम् । हविष्कृ꣡त꣢म् । ह꣣विः । कृ꣡त꣢꣯म् ॥१३४९॥

Mantra without Swara
नराशꣳसमिह प्रियमस्मिन्यज्ञ उप ह्वये । मधुजिह्वꣳ हविष्कृतम् ॥

नराशꣳसम् । इह । प्रियम् । अस्मिन् । यज्ञे । उप । ह्वये । मधुजिह्वम् । मधु । जिह्वम् । हविष्कृतम् । हविः । कृतम् ॥१३४९॥

Samveda - Mantra Number : 1349
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 11; Khand » 1;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(इह-अस्मिन् यज्ञे) इस जीवन में इस आत्मयजनकर्म अध्यात्मयज्ञ में (प्रियम्) प्रिय (मधुजिह्वम्) मधुरवाणी६ मधुर प्रवचन जिसका है या मधुर स्तुतिवाणी जिसके लिये है उस (हविष्कृतम्) आत्महवि को संस्कृत करने वाले (नराशंसम्) नरों-मुमुक्षुओं से७ प्रशंसनीय—अतिस्तुतियोग्य परमात्मा को (उपह्वये) अपहूत करता हूँ—अपनाता हूँ—उपासना में लाता हूँ॥३॥
Special
ऋषिः—मेधातिथिः (मेधा से परमात्मा में अतन गमन प्रवेश करने वाला उपासक)॥ देवता—नराशंसः (नरों [मुमुक्षुओं] का प्रशंसनीय परमात्मा) छन्दः—गायत्री॥