Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 1343

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- गोतमो राहूगणः Chhand- उष्णिक् Swara- ऋषभः
Mantra with Swara
क꣣दा꣡ मर्त꣢꣯मरा꣣ध꣡सं꣢ प꣣दा꣡ क्षुम्प꣢꣯मिव स्फुरत् । क꣣दा꣡ नः꣢꣯ शुश्रव꣣द्गि꣢र꣣ इ꣡न्द्रो꣢ अ꣣ङ्ग꣢ ॥१३४३॥

क꣣दा꣢ । म꣡र्त꣢꣯म् । अ꣣राध꣡स꣢म् । अ꣣ । राध꣡स꣢म् । प꣣दा꣢ । क्षु꣡म्प꣢꣯म् । इ꣡व । स्फुरत् । कदा꣢ । नः꣣ । शुश्रवत् । गि꣡रः꣢꣯ । इ꣡न्द्रः꣢꣯ । अ꣣ङ्ग꣢ ॥१३४३॥

Mantra without Swara
कदा मर्तमराधसं पदा क्षुम्पमिव स्फुरत् । कदा नः शुश्रवद्गिर इन्द्रो अङ्ग ॥

कदा । मर्तम् । अराधसम् । अ । राधसम् । पदा । क्षुम्पम् । इव । स्फुरत् । कदा । नः । शुश्रवत् । गिरः । इन्द्रः । अङ्ग ॥१३४३॥

Samveda - Mantra Number : 1343
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 10; Khand » 12;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(कदा) किसी समय (अराधसं मर्तम्) अराधना-उपासना न करने वाले—नास्तिकजन को (पदा क्षुम्पम्-इव स्फुरत्) पैर से सर्पछत्र—खुम निर्बल—वर्षा ऋतु में उत्पन्न छत्र बूटी को नष्ट करने जैसा नष्ट कर देता है२ (कदा) किसी भी समय (इन्द्रः) ऐश्वर्यवान् परमात्मा (नः-गिरः) हम उपासकों की स्तुतियों—प्रार्थनाओं को (अङ्ग शुश्रवत्) शीघ्र सुने—पूरा कर सके॥३॥
Special