Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 1332

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- अग्नयो धिष्ण्या ऐश्वराः Chhand- द्विपदा विराट् पङ्क्तिः Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
प꣡व꣢स्व सोम म꣣हे꣢꣫ दक्षा꣣या꣢श्वो꣣ न꣢ नि꣣क्तो꣢ वा꣣जी꣡ धना꣢꣯य ॥१३३२॥

प꣡व꣢꣯स्व । सो꣣म । महे꣢ । द꣡क्षा꣢꣯य । अ꣡श्वः꣢꣯ । न । नि꣣क्तः꣢ । वा꣣जी꣢ । ध꣡ना꣢꣯य ॥१३३२॥

Mantra without Swara
पवस्व सोम महे दक्षायाश्वो न निक्तो वाजी धनाय ॥

पवस्व । सोम । महे । दक्षाय । अश्वः । न । निक्तः । वाजी । धनाय ॥१३३२॥

Samveda - Mantra Number : 1332
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 10; Khand » 11;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Footnote
(देखो अर्थव्याख्या मन्त्र संख्या ४३०)
Special
ऋषिः—ऋणत्रसदस्यू ऋषी (ऋण-त्रास को क्षीणकर्ता जपपरायण स्वाध्यायशील)॥ देवता—पवमानः सोमः (धारारूप में प्राप्त होने वाला शान्तस्वरूप परमात्मा)॥ छन्दः—द्विपदा विराट्॥