Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 1310

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- शतं वैखानसाः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
प꣡व꣢मानस्य꣣ जि꣡घ्न꣢तो꣣ ह꣡रे꣢श्च꣣न्द्रा꣡ अ꣢सृक्षत । जी꣣रा꣡ अ꣢जि꣣र꣡शो꣢चिषः ॥१३१०॥

प꣡व꣢꣯मानस्य । जि꣡घ्न꣢꣯तः । ह꣡रेः꣢꣯ । च꣣न्द्राः꣢ । अ꣣सृक्षत । जीराः꣢ । अ꣣जिर꣡शो꣢चिषः । अ꣣जिर꣢ । शो꣣चिषः ॥१३१०॥

Mantra without Swara
पवमानस्य जिघ्नतो हरेश्चन्द्रा असृक्षत । जीरा अजिरशोचिषः ॥

पवमानस्य । जिघ्नतः । हरेः । चन्द्राः । असृक्षत । जीराः । अजिरशोचिषः । अजिर । शोचिषः ॥१३१०॥

Samveda - Mantra Number : 1310
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 10; Khand » 9;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(जिघ्नतः) दुःख दोषों को नष्ट करते हुए (अजिर-शोचिषः) गमन व्यापनशील तेज वाले (हरेः) सुखाहर्ता (पवमानस्य) धारारूप में प्राप्त होने वाले शान्तस्वरूप परमात्मा की (जीराः-चन्द्राः-असृक्षत) शीघ्रगति वाली१ आह्लादकारी आनन्दधारायें हम उपासकों पर बरस रही हैं॥१॥
Special
ऋषिः—वैखानसः (परमात्मा को विशेष खनन करने खोजने में कुशल)॥ देवता—पवमानः सोमः (शान्तस्वरूप परमात्मा)॥ छन्दः—गायत्री॥