Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 130

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
इ꣡न्द्रं꣢ व꣣यं꣡ म꣢हाध꣣न꣢꣫ इन्द्र꣣म꣡र्भे꣢ हवामहे । यु꣡जं꣢ वृ꣣त्रे꣡षु꣢ व꣣ज्रि꣡ण꣢म् ॥१३०॥

इ꣡न्द्र꣢꣯म् । व꣣य꣢म् । म꣣हाधने꣣ । महा । धने꣢ । इ꣡न्द्र꣢꣯म् अ꣡र्भे꣢꣯ । ह꣣वामहे । यु꣡ज꣢꣯म् । वृ꣣त्रे꣡षु꣢ । व꣣ज्रि꣡ण꣢म् ॥१३०॥

Mantra without Swara
इन्द्रं वयं महाधन इन्द्रमर्भे हवामहे । युजं वृत्रेषु वज्रिणम् ॥

इन्द्रम् । वयम् । महाधने । महा । धने । इन्द्रम् अर्भे । हवामहे । युजम् । वृत्रेषु । वज्रिणम् ॥१३०॥

Samveda - Mantra Number : 130
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 4;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 2;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(वयम्) हम (युजं वज्रिणम्-इन्द्रम्) हमारे साथ युक्त होने वाले साथी वज्री—वीर्यवान्-ओजस्वी परमात्मा को “वीर्यं वै वज्रः” [श॰ ७.३.१.१९] “वज्रो वा ओजः” [श॰ ८.४.१.२०] (वृत्रेषु) सद्गुण आवरक पापभावों में “पाप्मा वै वृत्रः” [श॰ ११.१.५.७] हमारे साथ चलते हुए (महाधने) संग्राम में “महाधने संग्राम नाम” [निघं॰ २.१७] (हवामहे) आहूत करते हैं—करें (अर्भे) “अर्भे-अनिष्टे” थोड़े अनिष्ट प्रसंग में (इन्द्रम्) परमात्मा को आहूत करते हैं।
Essence
हमारे अन्दर उठते हुए पापभावों के प्रति हमारा संग्राम चलने पर या उनसे अल्प अनिष्ट हो जाने पर वीर्यवान् बलवान् ओजस्वी परमात्मा का हमें स्मरण चिन्तन करना चाहिये॥६॥
Special
ऋषिः—मधुच्छन्दाः (मधु तन्त्र या मीठी इच्छा वाला)॥