Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 1283

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- प्रियमेध आङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ए꣣ष꣢꣫ वृषा꣣ क꣡नि꣢क्रदद्द꣣श꣡भि꣢र्जा꣣मि꣡भि꣢र्य꣣तः꣢ । अ꣣भि꣡ द्रोणा꣢꣯नि धावति ॥१२८३॥

ए꣣षः꣢ । वृ꣡षा꣢꣯ । क꣡नि꣢꣯क्रदत् । द꣣श꣡भिः꣢ । जा꣣मि꣡भिः꣢ । य꣣तः꣢ । अ꣣भि꣢ । द्रो꣡णा꣢꣯नि । धा꣣वति ॥१२८३॥

Mantra without Swara
एष वृषा कनिक्रदद्दशभिर्जामिभिर्यतः । अभि द्रोणानि धावति ॥

एषः । वृषा । कनिक्रदत् । दशभिः । जामिभिः । यतः । अभि । द्रोणानि । धावति ॥१२८३॥

Samveda - Mantra Number : 1283
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 10; Khand » 4;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(एषः-वृषा) यह कामनावर्षक सोम—परमात्मा (दशभिः-जामिभिः-यतः) दश गति करने वाली बढ़ी-चढ़ी५ स्तुतियों—मन के मनन, बुद्धि के विवेचन, चित्त के स्मरण, अहङ्कार के ममत्व तथा पाँच ज्ञानेन्द्रियों के श्रवण आदि और वाक् इन्द्रिय के प्रकथन रूप स्तुतियों द्वारा वशीकृत—वश किया हुआ (कनिक्रदत्) साधु उपदेश करता हुआ (द्रोणानि-अभि धावति) अधिकारी उपासक पात्रों की ओर गति करता है—उनको प्राप्त होता है॥४॥
Special