Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 1259

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- शुनःशेप आजीगर्तिः स देवरातः कृत्रिमो वैश्वामित्रः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ए꣣ष꣢ दे꣣वो꣡ र꣢थर्यति꣣ प꣡व꣢मानो दिशस्यति । आ꣣वि꣡ष्कृ꣢णोति वग्व꣣नु꣢म् ॥१२५९॥

एषः꣢ । दे꣣वः꣢ । र꣣थर्यति । प꣡व꣢꣯मानः । दि꣣शस्यति । आविः꣢ । आ꣣ । विः꣢ । कृ꣣णोति । वग्वनु꣢म् ॥१२५९॥

Mantra without Swara
एष देवो रथर्यति पवमानो दिशस्यति । आविष्कृणोति वग्वनुम् ॥

एषः । देवः । रथर्यति । पवमानः । दिशस्यति । आविः । आ । विः । कृणोति । वग्वनुम् ॥१२५९॥

Samveda - Mantra Number : 1259
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 10; Khand » 1;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(एषः-पवमानः-देवः) यह आनन्दधारा में आता हुआ द्योतमान सोम परमात्मा (रथर्यति) उपासक को रथ-रमणस्थान बनाना चाहता है (दिशस्यति) उसे अपना आनन्दरस देना चाहता है (वग्वनुम्-आविष्कृणोति) मधुरवाणी५ आशीर्वाद-रूप को प्रकट करता है या उपासक की स्तुति वाणी को सफल करता है॥४॥
Special