Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 123

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- मेधातिथिः काण्वः प्रियमेधश्चाङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
प꣡न्यं꣢पन्य꣣मि꣡त्सो꣢तार꣣ आ꣡ धा꣢वत꣣ म꣡द्या꣢य । सो꣡मं꣢ वी꣣रा꣢य꣣ शू꣡रा꣢य ॥१२३॥

प꣡न्य꣢꣯म्पन्यम् । प꣡न्य꣢꣯म् । प꣣न्यम् । इ꣢त् । सो꣣तारः । आ꣢ । धा꣣वत । म꣡द्या꣢꣯य । सो꣡म꣢꣯म् । वी꣣रा꣡य꣢ । शू꣡रा꣢꣯य ॥१२३॥

Mantra without Swara
पन्यंपन्यमित्सोतार आ धावत मद्याय । सोमं वीराय शूराय ॥

पन्यम्पन्यम् । पन्यम् । पन्यम् । इत् । सोतारः । आ । धावत । मद्याय । सोमम् । वीराय । शूराय ॥१२३॥

Samveda - Mantra Number : 123
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 3;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 1;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(सोतारः) हे स्तवन सम्पादन करनेवालो! (मद्याय) हर्षयिता—(वीराय) वीर—शक्तिमान् (शूराय) पराक्रमी इन्द्र परमात्मा के लिए (पन्यं-पन्यं सोमम्) स्तुत्य स्तुत्य—आत्मभाव से हार्दिक स्तवन स्तुति प्रवाह को (आधावत) समर्पित करो।
Essence
हे उपासको! शक्तिमान् पराक्रमी हर्षित करनेवाले परमात्मा के लिये हल्का स्तवन नहीं, किन्तु भारी हार्दिक स्तवन समर्पित करो जिससे वह अतिहर्षित करें॥९॥
Special
ऋषिः—मेधातिथिः-आङ्गिरसः (मेधा से अतन प्रवेश करनेवाला संयमी जन)॥