Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 1217

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- निध्रुविः काश्यपः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ꣡यु꣢क्त꣣ सू꣢र꣣ ए꣡त꣢शं꣣ प꣡व꣢मानो म꣣ना꣡वधि꣢꣯ । अ꣣न्त꣡रि꣢क्षेण꣣ या꣡त꣢वे ॥१२१७॥

अ꣡यु꣢꣯क्त । सू꣡रः꣢꣯ । ए꣡त꣢꣯शम् । प꣡व꣢꣯मानः । म꣣नौ꣢ । अ꣡धि꣢꣯ । अ꣣न्त꣡रि꣢क्षेण । या꣡त꣢꣯वे ॥१२१७॥

Mantra without Swara
अयुक्त सूर एतशं पवमानो मनावधि । अन्तरिक्षेण यातवे ॥

अयुक्त । सूरः । एतशम् । पवमानः । मनौ । अधि । अन्तरिक्षेण । यातवे ॥१२१७॥

Samveda - Mantra Number : 1217
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 9; Khand » 5;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(सूरः) सरणशील—व्यापनशील (पवमानः) आनन्दधारारूप में आने वाला परमात्मा (मनौ-अधि) विद्वान् उपासक१ के अन्दर (एतशम्-अयुक्त) मनरूप घोड़े को जोड़ दे—लगा दे (अन्तरिक्षेण यातवे) आत्मा—अध्यात्ममार्ग से२ जाने को॥२॥
Special