Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 1204

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- असितः काश्यपो देवलो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ꣣भि꣢ प्रि꣣या꣢ दि꣣वः꣢ क꣣वि꣢꣫र्विप्रः꣣ स꣡ धार꣢꣯या सु꣣तः꣢ । सो꣡मो꣢ हिन्वे परा꣣व꣡ति꣢ ॥१२०४॥

अ꣣भि꣢ । प्रि꣣या꣢ । दि꣣वः꣢ । क꣣विः꣢ । वि꣡प्रः꣢꣯ । वि । प्रः꣣ । सः꣢ । धा꣡र꣢꣯या । सु꣣तः꣢ । सो꣡मः꣢꣯ । हि꣣न्वे । पराव꣡ति꣢ ॥१२०४॥

Mantra without Swara
अभि प्रिया दिवः कविर्विप्रः स धारया सुतः । सोमो हिन्वे परावति ॥

अभि । प्रिया । दिवः । कविः । विप्रः । वि । प्रः । सः । धारया । सुतः । सोमः । हिन्वे । परावति ॥१२०४॥

Samveda - Mantra Number : 1204
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 9; Khand » 3;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(सः-कविः) वह क्रान्तदर्शी सर्वज्ञ (विप्रः) विविध प्रकार से तृप्त करने वाला (सोमः) शान्तस्वरूप परमात्मा (धारया सुतः) स्तुतिवाणी१ द्वारा साक्षात् किया हुआ (दिवः) मोक्षधाम के (प्रिया) प्रिय—कमनीय सुखों को (परावति) दूर स्थान में (अभि) कहीं भी जहाँ स्तुति करी हों उन्हें लक्ष्य कर (हिन्वे) प्रेरित करता है॥९॥
Special