Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 1183

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- असितः काश्यपो देवलो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
पु꣣नानः꣢ क꣣ल꣢शे꣣ष्वा꣡ वस्त्रा꣢꣯ण्यरु꣣षो꣡ हरिः꣢꣯ । प꣢रि꣣ ग꣡व्या꣢न्यव्यत ॥११८३॥

पुनानः꣢ । क꣣ल꣡शे꣢षु । आ । व꣡स्त्रा꣢꣯णि । अ꣣रुषः꣢ । ह꣡रिः꣢꣯ । प꣡रि꣢꣯ । ग꣡व्या꣢꣯नि । अ꣣व्यत ॥११८३॥

Mantra without Swara
पुनानः कलशेष्वा वस्त्राण्यरुषो हरिः । परि गव्यान्यव्यत ॥

पुनानः । कलशेषु । आ । वस्त्राणि । अरुषः । हरिः । परि । गव्यानि । अव्यत ॥११८३॥

Samveda - Mantra Number : 1183
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 9; Khand » 1;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(अरुषः-हरिः) आरोचमान दुःखापहर्ता सुखाहर्ता परमात्मा (कलशेषु) कलास्थानों में—जहाँ परमात्मा की कलाएँ भासित होती हैं वहाँ स्तुत किया जाता हुआ—चिन्तन किया जाता हुआ (वस्त्राणि गव्यानि) वस्त्ररूप स्तुतिवाणियों को (परि-अव्यत) ओढता है—उस हृदयस्थान में आकर॥६॥
Special