Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 1180

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- असितः काश्यपो देवलो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
इ꣡न्द्र꣢स्य सोम꣣ रा꣡ध꣢से पुना꣣नो꣡ हार्दि꣢꣯ चोदय । दे꣣वा꣢नां꣣ यो꣡नि꣢मा꣣स꣡द꣢म् ॥११८०॥

इ꣡न्द्र꣢꣯स्य । सो꣣म । रा꣡ध꣢꣯से । पु꣣नानः꣢ । हा꣡र्दि꣢꣯ । चो꣣दय । देवा꣡ना꣢म् । यो꣡नि꣢꣯म् । आ꣣स꣡द꣢म् । आ꣣ । स꣡द꣢꣯म् ॥११८०॥

Mantra without Swara
इन्द्रस्य सोम राधसे पुनानो हार्दि चोदय । देवानां योनिमासदम् ॥

इन्द्रस्य । सोम । राधसे । पुनानः । हार्दि । चोदय । देवानाम् । योनिम् । आसदम् । आ । सदम् ॥११८०॥

Samveda - Mantra Number : 1180
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 9; Khand » 1;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(सोम) हे शान्तस्वरूप परमात्मन्! तू (राधसे) अपनी आराधना उपासना कराने के लिये (देवानाम्-आसदं इन्द्रस्य योनिं पुनानः हार्दि चोदय) देववृत्तियों—सद्वृत्तियों के समन्तरूप से बैठने योग्य मुझ आत्मा के स्थान हृदयगृह को पवित्र करता हुआ प्रेरित कर जिससे तेरी उपासना कर सकूँ, हृदय की गन्ध आदि वृत्ति नहीं इन्द्रियों की असुरवृत्तियाँ और देववृत्तियाँ पर्याय से आती रहती हैं॥३॥
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