Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 1158

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- पर्वतनारदौ काण्वौ शिखण्डिन्यावप्सरसौ काश्यपौ वा Chhand- उष्णिक् Swara- ऋषभः
Mantra with Swara
स꣡मी꣢ व꣣त्सं꣢꣫ न मा꣣तृ꣡भिः꣢ सृ꣢ज꣡ता꣢ गय꣣सा꣡ध꣢नम् । दे꣣वाव्यां꣣꣬३꣱म꣡द꣢म꣣भि꣡ द्विश꣢꣯वसम् ॥११५८॥

सम् । ई꣣ । वत्स꣢म् । न । मा꣣तृ꣡भिः꣢ । सृ꣣ज꣢त꣢ । ग꣣यसा꣡ध꣢नम् । ग꣣य । सा꣡ध꣢꣯नम् । देवाव्य꣣꣬म् । दे꣣व । अव्य꣣꣬म् । म꣡द꣢꣯म् । अ꣣भि꣢ । द्वि꣡श꣢꣯वसम् ॥११५८॥

Mantra without Swara
समी वत्सं न मातृभिः सृजता गयसाधनम् । देवाव्यां३मदमभि द्विशवसम् ॥

सम् । ई । वत्सम् । न । मातृभिः । सृजत । गयसाधनम् । गय । साधनम् । देवाव्यम् । देव । अव्यम् । मदम् । अभि । द्विशवसम् ॥११५८॥

Samveda - Mantra Number : 1158
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 8; Khand » 5;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(गयसाधनम्) प्राणों*93 के साधने—उन्नत करने वाले—(देवाव्यम्) मुमुक्षुजनों द्वारा कमनीय—(मदम्) हर्ष आनन्द के देनेवाले—(द्विशवसम्) दो बलोंवाले सृष्टिरचन और जीवों के कर्मफल देने का बल रखने वाले, ऐसे (तम्) उस सोम—शान्तस्वरूप परमात्मा को (वत्सं न मातृभिः-अभि सं सृजत) बछड़े को जैसे माताओं—गौओं से मिलाते हैं ऐसे मान करनेवाली देववृत्तियों से मिलाओ॥२॥
Footnote
[*93. “प्राणा वै गयाः” [श॰ १४.८.१५.७]।]
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