Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 1143

1875 Mantra
Devata- मित्रावरुणौ Rishi- यजत आत्रेयः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
प्र꣡ वो꣢ मि꣣त्रा꣡य꣢ गायत꣣ व꣡रु꣢णाय वि꣣पा꣢ गि꣣रा꣢ । म꣡हि꣢क्षत्रावृ꣣तं꣢ बृ꣣ह꣢त् ॥११४३॥

प्र꣢ । वः꣣ । मित्रा꣡य꣢ । मि꣣ । त्रा꣡य꣢꣯ । गा꣣यत । व꣡रु꣢꣯णाय । वि꣣पा꣢ । गि꣣रा꣢ । म꣡हि꣢꣯क्षत्रौ । म꣡हि꣢꣯ । क्ष꣣त्रौ । ऋत꣢म् । बृ꣣ह꣢त् ॥११४३॥

Mantra without Swara
प्र वो मित्राय गायत वरुणाय विपा गिरा । महिक्षत्रावृतं बृहत् ॥

प्र । वः । मित्राय । मि । त्राय । गायत । वरुणाय । विपा । गिरा । महिक्षत्रौ । महि । क्षत्रौ । ऋतम् । बृहत् ॥११४३॥

Samveda - Mantra Number : 1143
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 8; Khand » 3;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(वः) हे उपासको तुम*63 (मित्राय) अभ्युदयकार्य में प्रेरक परमात्मा के लिए (वरुणाय) मोक्षप्राप्ति के लिए अपनी ओर वरनेवाले परमात्मा के लिए (विपा गिरा) विशेष स्तुति करनेवाली वाणी से*64 (ऋतं बृहत्-प्रगायत) सत्य और महत्—अच्छा मधुर गाओ बखान करो (महिक्षत्रौ) जो महान् धनवाले हैं॥१॥
Footnote
[*63. विभक्तिव्यत्ययः।] [*64. “पन स्तुतौ” ततो विपूर्वाद् डः।]
Special
ऋषिः—यजतः (अध्यात्मयाजक)॥ देवता—मित्रावरुणौ (उपयोगी कार्य में प्रेरक और अपनी ओर वरने वाला परमात्मा)॥ छन्दः—गायत्री॥